अल्लाह की मर्ज़ी के आगे हर इंसान बेबस है। दुनिया की यह ज़िंदगी फ़ानी है और हर जान को एक दिन अपने रब की बारगाह में लौटकर जाना है।
बेइंतिहा अफ़सोस और दिली रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन शनिचर, बा-तारीख़ 31 अक्टूबर 2026 को सुंदर नगरी, दिल्ली में जनाब मोहम्मद सलीम वल्द मरहूम मोहम्मद इस्माइल (नगले वाले) का लंबी बीमारी के बाद क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।
मरहूम का ताल्लुक़ उत्तर प्रदेश के ज़िला मुज़फ्फरनगर के क़स्बा खतौली से था। वह बुढ़ाना रोड, क़स्बा खतौली के रहने वाले थे। उनके भाई और परिवार के दूसरे अफ़राद भी खतौली में ही मुक़ीम हैं। मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों में ग़म की लहर दौड़ गई है। एक इंसान का दुनिया से रुख़्सत हो जाना उसके घर-परिवार के लिए ऐसा सदमा होता है, जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं।
दफ़्न और नमाज़-ए-जनाज़ा के वक़्त की इत्तिला
ख़बर लिखे जाने तक मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन (सुपुर्द-ए-ख़ाक) के वक़्त और मुक़ाम की पुख़्ता जानकारी हासिल नहीं हो सकी है। जैसे ही अहले ख़ाना की तरफ़ से कोई तस्दीक़शुदा इत्तिला हासिल होगी, उसे बिरादरी के तमाम हज़रात तक पहुँचाने के लिए ख़बर को अपडेट कर दिया जाएगा।
तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके अहले ख़ाना को इस मुश्किल घड़ी में सब्र की तलक़ीन करें।
मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत
اَللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهٗ وَارْحَمْهُ وَعَافِهٖ وَاعْفُ عَنْهُ وَأَكْرِمْ نُزُلَهٗ وَوَسِّعْ مُدْخَلَهٗ
या अल्लाह! मरहूम मोहम्मद सलीम की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमा और उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा।
या रब्बुल आलमीन! उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तंगी और तारीकी को दूर फ़रमा। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रख और मुनकर-नकीर के सवालों के जवाब आसान फ़रमा।
ऐ अल्लाह! मरहूम को क़ब्र में उतारने वाले तमाम हाथों पर अपना करम फ़रमा। जो लोग उनके जिस्म-ए-मुबारक को क़ब्र में उतारें, उन्हें अज्र-ए-अज़ीम अता फ़रमा। जो लोग उनके जिस्म पर मिट्टी डालें, उनके इस अमल को नेकियों में शुमार फ़रमा और मरहूम के लिए इस मिट्टी को रहमत और नूर का ज़रिया बना दे।
या अल्लाह! उनकी क़ब्र को जन्नत की ठंडी हवाओं से भर दे, उनकी तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।
ऐ अल्लाह! मरहूम के तमाम गुनाहों को नेकीयों में तब्दील फ़रमा, उनकी आख़िरत आसान फ़रमा और उन्हें अपने महबूब बंदों में शामिल फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।
अहले ख़ाना के लिए दुआ
हम तमाम बिरादराना हज़रात की तरफ़ से मरहूम के तमाम अहले ख़ाना, भाई-बहनों, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब के साथ इस ग़म की घड़ी में दिली हमदर्दी और ताज़ियत का इज़हार करते हैं।
अल्लाह तआला तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए, इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत दे और मरहूम की जुदाई को उनके लिए सब्र और अज्र का ज़रिया बनाए।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
ख़बर एवं इत्तिला
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए दिल्ली डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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