Wednesday, July 16, 2025

नसीहतनामा : अंजुमन की हकीकत, एक समाजसेवी की ज़ुबानी

✍️ अलीहसन मुल्तानी

📍 बड़ौत, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश
📌 मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका विशेष स्तंभ

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहुं।

मोहतरम व मुअज्ज़ज़ मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरान,

अदब, एहतराम और इज्जत के साथ आप तमाम अज़ीज़ों की खिदमत में एक अहम और ज़रूरी पैग़ाम पेश है, जो एक साल से ज्यादा के मबाद आज आप तक बहुत ही जिम्मेदारी के साथ पहुंचाया जा रहा है।

सच कहने का हौसला – खामोशियों का हिसाब

बीते सालों में अंजुमन को लेकर हमने हर वह बात आपकी खिदमत में रखी जो हकीकत थी, है और रहेगी। हम ना तो कभी डरे, ना ही झूठ का सहारा लिया और ना ही किसी पर्दा पोशी में यकीन रखा। जो कहा, खुले अल्फ़ाज़ में कहा। जो उठाया, दस्तावेज़ों और ज़मीर के साथ उठाया।

हमने अंजुमन को कभी अपना निजी ज़रिया नहीं समझा, बल्कि उसे बिरादरी की अमानत माना। लेकिन अफसोसनाक सच्चाई ये है कि:

  • अंजुमन की मौजूदा/पूर्व कमेटियों ने अंजुमन के नाम पर खुद ही बेजा हरकतें कीं।
  • बिना बिरादरी की इजाजत और सहमति के लाखों-करोड़ों की रसीदें छपवाकर चंदा वसूल किया गया और वह रकम हिसाब के बिना 'हज़म' कर ली गई।
  • कमेटियों ने अंजुमन को ताले में बंद कर दिया, लेकिन अपनी जवाबदेही के दरवाज़े नहीं खोले।
  • जब भी सवाल किए गए, उन्होंने या तो मुंह फेर लिया या समाज के सामने आने से परहेज़ किया।

अब चुप्पी नहीं, अब सच्चाई का वक़्त है

आज जब इन कमेटियों की पोल खुल चुकी है, जब बिरादरी सवाल कर रही है, तो इन्हें जवाब देना चाहिए। अगर उनके पास दयानतदारी, ईमानदारी और वफादारी है, तो बिरादरी के सामने एक खुला इजलास बुलाएं और साबित करें कि वो हक़ पर हैं।

अगर उनके पास छुपाने को कुछ नहीं है, तो फिर सामने आने से कतराहट क्यों?

खामोशियाँ खतरे में बदलती हैं

मैं, अलीहसन मुल्तानी, बतौर समाजसेवी, यह बात जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि अंजुमन की मौजूदा व्यवस्था से मेरी और मेरे परिवार की जान-माल, इज़्ज़त-आबरू को खतरा है। मुझे बदनाम करने और मेरी आवाज़ को दबाने की साज़िशें की जा रही हैं। लेकिन यकीन रखिए:

"वतु'इज्जु मंतशा – इज्ज़त उसी को मिलती है जिसे अल्लाह चाहता है"।

मेरा मक़सद ना तकरार है, ना तजवीज़ पर सवाल उठाना। मेरा मक़सद है बिरादरी को सही रास्ता दिखाना, सच्चाई से रु-ब-रु कराना।

आखिरी अल्फ़ाज़ – आप से गुज़ारिश

मैं आप तमाम बिरादराने अहले-मुल्तानी से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि इस आवाज़ को अपनी आवाज़ बनाएं, इस हक़ को अपना हक़ समझें। सवाल करना ज़रूरी है, जवाब मांगना बिरादरी का हक़ है।

अस्सलामु अ़लैईकुम व रहमतुल्लाह।


📌  "मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए  अलीहसन मुल्तानी का लेख 
📞 संपर्क: अलीहसन मुल्तानीवरिष्ठ समाजसेवी
📱 8010884848
📧 multanisamaj@gmail.com
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