सहारनपुर जनपद के क़स्बा नकुड़ से एक बेहद दुखद और दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में गम का माहौल पैदा कर दिया है। जिंदगी की हकीकत एक बार फिर सबके सामने आई—जहां खुशियाँ अभी दस्तक ही दे रही थीं, वहीं अचानक मातम ने घर कर लिया।
मिली जानकारी के अनुसार, क़स्बा नकुड़ निवासी जनाब मरहूम अख्तर साहब के बेटे की अहलिया, जो कि देवबंद (जिला सहारनपुर) के हाफिज अतीक साहब की साहबजादी थीं, उनका 20 अप्रैल 2026, दिन सोमवार की रात चंडीगढ़ में इलाज के दौरान इंतकाल हो गया। यह खबर जैसे ही इलाके में फैली, हर दिल ग़मगीन हो उठा।
सबसे ज्यादा दर्दनाक पहलू यह है कि इस नवविवाहिता की शादी को अभी महज़ 4 महीने और 10 दिन ही गुजरे थे। जिस घर में अभी नई-नई खुशियों की शुरुआत हुई थी, वहां इतनी जल्दी मातम छा जाना हर किसी को अंदर तक तोड़ देने वाला है। यह घटना हमें एक बार फिर यह याद दिलाती है कि इंसानी जिंदगी कितनी नाज़ुक और अनिश्चित है—कब, किस मोड़ पर, क्या हो जाए, कोई नहीं जानता।
परिजनों और आसपास के लोगों के लिए यह सदमा बेहद गहरा है। हर आंख नम है और हर दिल दुआगो। ऐसे वक्त में हर कोई यही कह रहा है—
“अल्लाह की जैसी मर्जी, वही हकीकत है… और आखिरकार हर एक को उसी की तरफ लौटकर जाना है।”
अल्लाह रब्बुल करीम से दुआ है कि मरहूमा की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और घरवालों को सब्र-ए-जमील नसीब फरमाए। आमीन।
🕌 जनाजे की नमाज आज, 21 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को अदा की जाएगी। तमाम अहबाब से गुजारिश है कि जनाजे में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआएं करें और सवाबे दारेन हासिल करें।
✍️ रिपोर्ट: अब्दुल खालिक साहब (सहारनपुर)
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यह खबर केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक गहरी सीख भी है—ज़िंदगी की कद्र करें, अपनों के साथ हर लम्हा मोहब्बत से जिएं… क्योंकि वक्त का कोई भरोसा नहीं।