दूसरों की कमेटियों के चुनाव में इतनी दिलचस्पी तो अपनी कमेटी के इलेक्शन का इंतज़ार कब तक?
खतौली/नगीना/बिजनौर, उत्तर प्रदेश।
मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में तंजीमी निज़ाम, जम्हूरी उसूल और कमेटियों के बाकायदा चुनाव को लेकर हमेशा से यह उम्मीद की जाती रही है कि बिरादरी की तमाम तंजीमें अपने-अपने दस्तूरी और जम्हूरी उसूलों के मुताबिक काम करें और वक्त-वक्त पर अपनी कमेटियों में चुनाव के ज़रिए नई क़यादत और नए लोगों को आगे आने का मौक़ा दें।
हाल ही में नगीना, जनपद बिजनौर में बिरादरी की एक कमेटी के ओहदेदारों के चुनाव का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस चुनाव में जनपद मुज़फ्फरनगर के क़स्बा खतौली से संचालित हमारी ही बिरादरी की एक सोसायटी के सदर और उनकी कमेटी के ज़िम्मेदारों की मौजूदगी और सरगर्म हिस्सेदारी सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में दिखाई दी।
सोशल मीडिया पर उस तंजीम के ज़िम्मेदारों द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो से यह ज़ाहिर होता है कि खतौली की उक्त सोसायटी के सदर अपनी कमेटी के कई ज़िम्मेदारों के साथ नगीना पहुंचे और वहां बिरादरी की कमेटी के चुनावी अमल में सक्रिय रूप से शामिल रहे।
बिरादरी की नज़र से देखा जाए तो यह पहल अपने आप में खुशी की बात है। आखिर हमारी बिरादरी की किसी भी कमेटी में अगर चुनाव का अमल होता है और बिरादरी के लोग जम्हूरी तरीके से अपने ओहदेदारों का इंतिखाब करते हैं, तो यह तंजीमी बेदारी की अलामत है।
लेकिन इसी तस्वीर का दूसरा पहलू भी है, और यही वह सवाल है जो बिरादरी के कई लोगों के ज़ेहन में लंबे समय से मौजूद है।
जब दूसरों की कमेटियों के चुनाव इतने अहम हैं, तो अपनी कमेटी का चुनाव कब?
बिरादरी में यह सवाल बार-बार उठता रहा है कि खतौली से संचालित यह तंजीम खुद अपनी कमेटी के बाकायदा चुनाव कब कराएगी?
जो तंजीम दूसरी जगहों पर बिरादरी की कमेटियों के चुनाव को इतनी दिलचस्पी और संजीदगी के साथ मुकम्मल कराने में अपना किरदार अदा कर रही है, उससे बिरादरी की स्वाभाविक उम्मीद है कि वह अपने यहां भी उसी जम्हूरी रिवायत को कायम करेगी।
नगीना में हुए चुनाव के दौरान खतौली की तंजीम के ज़िम्मेदारों की सरगर्म मौजूदगी देखकर बिरादरी के बीच एक दिलचस्प सवाल ने फिर सिर उठाया है—
क्या नगीना के चुनाव से खतौली की तंजीम के ज़िम्मेदार अपने लिए भी कोई जम्हूरी सबक लेकर लौटे हैं?
अगर जवाब हाँ है, तो यक़ीनन बिरादरी को इससे खुशी होगी।
नगीना से मिले जम्हूरी सबक को खतौली में कब लागू किया जाएगा?
नगीना में चुनावी अमल को करीब से देखने के बाद अगर खतौली की यह तंजीम भी अपनी कमेटी के चुनाव कराने की तैयारी करती है, तो इसे बिरादरी में एक सकारात्मक और काबिल-ए-तारीफ पहल के तौर पर देखा जाएगा।
क्योंकि किसी भी तंजीम की ताक़त सिर्फ उसके ओहदेदारों में नहीं होती, बल्कि उसकी असल ताक़त बिरादरी के भरोसे, जम्हूरी निज़ाम, जवाबदेही और नई क़यादत को मौक़ा देने में होती है।
वक्त के साथ कमेटियों में नए लोगों को आगे आने का मौक़ा देना, पुराने ज़िम्मेदारों के तजुर्बे से फायदा उठाना और बाकायदा चुनाव के ज़रिए जिम्मेदारियां तय करना किसी भी बिरादरी की तंजीमी तरक़्क़ी के लिए अहम है।
बिरादरी अब खतौली की तरफ देख रही है
नगीना में चुनाव का अमल मुकम्मल हो चुका है। वहां बिरादरी ने अपने ओहदेदारों का इंतिखाब कर लिया।
अब निगाहें खतौली की तरफ हैं।
बिरादरी यह देखना चाहती है कि नगीना के चुनाव में इतनी दिलचस्पी और सरगर्मी के साथ शामिल होने वाली खतौली की यह सोसायटी अपनी कमेटी के चुनाव का ऐलान कब करती है?
क्या वहां भी बिरादरी के तमाम अफ़राद को जम्हूरी तरीके से अपनी पसंद की क़यादत चुनने का मौक़ा मिलेगा?
क्या पुरानी कमेटी में नए लोगों को शामिल करने और जिम्मेदारियों में तब्दीली का अमल शुरू होगा?
और सबसे अहम सवाल—
क्या नगीना का चुनाव खतौली की तंजीम के लिए भी एक नई जम्हूरी शुरुआत का पैग़ाम लेकर आया है?
इन सवालों का जवाब आने वाला वक्त देगा।
“मुल्तानी समाज” की अपील
हमारा मक़सद किसी शख्स, कमेटी या तंजीम की तौहीन करना नहीं, बल्कि बिरादरी में जम्हूरी सोच, तंजीमी पारदर्शिता और जवाबदेही के हवाले से एक अहम सवाल बिरादरी के सामने रखना है।
अगर खतौली की सोसायटी के दस्तूर में कमेटी के चुनाव का कोई तय तरीका या मुद्दत मौजूद है, तो बिरादरी को उसी दस्तूर के मुताबिक चुनाव की तारीख और तरीका बताकर तस्वीर साफ़ करनी चाहिए।
और अगर नगीना के चुनाव से कोई अच्छा तंजीमी सबक मिला है, तो उससे बेहतर बात क्या होगी कि वही सबक अब अपनी तंजीम में भी अमल के साथ नज़र आए।
दूसरों की कमेटियों में जम्हूरियत को मजबूत करना यक़ीनन अच्छी बात है—और अपनी कमेटी में भी उसी जम्हूरियत को कायम करना उससे भी ज्यादा खूबसूरत मिसाल होगी।
अब बिरादरी इंतज़ार में है कि खतौली की यह सोसायटी अपनी कमेटी के चुनाव का ऐलान कब करती है।
मुल्तानी समाज — ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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