Monday, September 21, 2026

जनाब ज़लील अहमद का इंतिक़ाल, बिरादरी में ग़म की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन —

नगीना (बिजनौर)। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहल्ला लुहारी सराय, क़स्बा नगीना, ज़िला बिजनौर, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब ज़लील अहमद वल्द जनाब शब्बीर अहमद, उम्र तक़रीबन 50 साल, आज मंगलवार, 22 सितंबर 2022 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल फ़रमा गए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से खानदान, रिश्तेदारों, अहबाब और बिरादरी के लोगों में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है। इस मुश्किल घड़ी में हम तमाम अहले-खानदान के ग़म में बराबर के शरीक हैं और बारगाह-ए-रब्बुल-आलमीन में मरहूम के लिए ख़ास दुआ-ए-मग़फ़िरत करते हैं।

या अल्लाह! मरहूम जनाब ज़लील अहमद की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, क़ब्र को कुशादा और आराम की जगह बना, उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा और उनके तमाम गुनाहों को अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से माफ़ फ़रमा। आमीन या रब्बुल-आलमीन।

दफ़्न और नमाज़-ए-जनाज़ा की जानकारी बाद में

ख़बर लिखे जाने तक मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा और दफ़्न का वक़्त व मुक़ाम ज़िम्मेदारान की जानिब से तय नहीं हो पाया था। जैसे ही नमाज़-ए-जनाज़ा और दफ़्न से मुताल्लिक़ कोई जानकारी हासिल होगी, उसे ख़बर में फ़ौरन अपडेट कर दिया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जानकारी मिलने पर नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और दफ़्न के मौक़े पर शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें।

क़ब्र में उतारते और मिट्टी देते वक़्त दुआ

मरहूम को क़ब्र में उतारते वक़्त तमाम हाज़िरीन अल्लाह तआला को याद करते हुए उनके लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें। मिट्टी देते वक़्त यह आयत पढ़ना मुनासिब है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

"इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, और इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे, और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।"

या अल्लाह! इस क़ब्र को मरहूम के लिए जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, इसे जहन्नम के गड्ढों में से कोई गड्ढा न बना। मरहूम को क़ब्र के सवालात में आसानी अता फ़रमा और उन्हें अपने रहमत व मग़फ़िरत के साये में जगह अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल-आलमीन।

अल्लाह तआला तमाम अहले-ख़ानदान को यह सदमा बर्दाश्त करने का हौसला, सब्र-ए-जमील और अज़्रे-अज़ीम अता फ़रमाए तथा मरहूम के लिए सदक़ा-ए-जारीया और नेक औलाद के ज़रिये उनके दरजात बुलंद फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।


ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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