नगर पंचायत बेहट के वार्ड नंबर-12 से सिर्फ़ फैसल मिर्ज़ा ने दाखिल किया नामांकन • नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति • वालिद मरहूम मास्टर जमील साहब की सादगी और नेकदिली को किया गया याद
बेहट/सहारनपुर।
नगर पंचायत बेहट के वार्ड नंबर-12, मोहल्ला लोहारान में उस वक़्त एक ख़ास सियासी और सामाजिक तस्वीर सामने आई, जब मरहूम सभासद मास्टर जमील साहब के इंतक़ाल के बाद रिक्त हुई सभासद की सीट के लिए उनके साहेबज़ादे फैसल मिर्ज़ा ने नामांकन की आख़िरी तारीख़ को तहसील बेहट पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
मास्टर जमील साहब वार्ड नंबर-12 के सभासद रहे थे। उनके इंतक़ाल के बाद यह सीट रिक्त हो गई थी, जिसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव का कार्यक्रम जारी किया गया। उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक यह सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है और 13 अक्टूबर को मतदान तथा 15 अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित की गई थी।
फैसल मिर्ज़ा के अलावा किसी और ने नहीं भरा पर्चा
नामांकन की निर्धारित आख़िरी तारीख़ तक फैसल मिर्ज़ा के अलावा किसी अन्य प्रत्याशी द्वारा नामांकन दाखिल नहीं किए जाने से वार्ड नंबर-12 में चुनावी तस्वीर लगभग साफ़ हो गई है।
हालांकि नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी तथा निर्वाचन संबंधी अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं अभी पूरी होनी बाकी हैं। इसलिए आधिकारिक रूप से निर्विरोध निर्वाचित होने की घोषणा संबंधित निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही मानी जाएगी।
यदि कोई अन्य वैध प्रत्याशी मैदान में नहीं आता और निर्वाचन प्रक्रिया इसी प्रकार आगे बढ़ती है, तो वार्ड नंबर-12 में मतदान की आवश्यकता नहीं रह जाएगी।
वालिद की विरासत को आगे बढ़ाने का मौक़ा
फैसल मिर्ज़ा के नामांकन के साथ ही वार्ड में उनके वालिद-ए-मोहतरम मास्टर जमील साहब मरहूम की यादें भी ताज़ा हो गईं।
इलाक़ाई लोगों के बीच मास्टर जमील साहब की सादगी, मिलनसारी, नेकदिली, खुश-अख़लाक़ी और लोगों से मोहब्बत का ज़िक्र आज भी सम्मान के साथ किया जाता है। ऐसे में उनके साहेबज़ादे का उसी वार्ड से सभासद पद के लिए आगे आना उनके परिवार के लिए महज़ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपने मरहूम वालिद की सामाजिक विरासत और लोगों से जुड़े रिश्तों को आगे बढ़ाने के एक मौक़े के तौर पर भी देखा जा रहा है।
नामांकन के दौरान मौजूद रहे सम्मानित लोग
फैसल मिर्ज़ा के नामांकन के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष अब्दुल रहमान उर्फ़ शालू भैया, सभासद प्रतिनिधि मिर्ज़ा अब्दुल मलिक, समाजसेवी अतीक मिर्ज़ा तथा अबरार मिर्ज़ा (सदर) समेत अनेक सम्मानित साथी एवं समर्थक मौजूद रहे।
नामांकन के दौरान समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया और सभी ने फैसल मिर्ज़ा के लिए नेक ख़्वाहिशात का इज़हार किया।
मरहूम मास्टर जमील साहब की नेकनामी का असर
इलाक़े में यह चर्चा भी है कि फैसल मिर्ज़ा को मिल रही यह मोहब्बत और समर्थन उनके वालिद मरहूम मास्टर जमील साहब द्वारा लोगों के साथ बनाए गए अच्छे रिश्तों का भी नतीजा है।
किसी इंसान के जाने के बाद भी अगर उसकी सादगी, किरदार, नेकदिली और अच्छे अख़लाक़ लोगों के दिलों में ज़िंदा रहें, तो इससे बड़ी सामाजिक पूंजी और क्या हो सकती है। मास्टर जमील साहब ने अपने व्यवहार और सामाजिक संबंधों से जो जगह बनाई, आज उनके साहेबज़ादे फैसल मिर्ज़ा के लिए वही मोहब्बत और दुआएं दिखाई दे रही हैं।
‘मुल्तानी समाज’ की तरफ़ से दिली मुबारकबाद
मुल्तानी समाज की तरफ़ से फैसल मिर्ज़ा को नामांकन दाखिल करने पर दिली मुबारकबाद पेश की जाती है और उनके लिए कामयाबी, नेकनामी तथा अवाम की ख़िदमत की दुआ की जाती है।
साथ ही मरहूम मास्टर जमील साहब के लिए अल्लाह तआला से मग़फ़िरत और बुलंद दरजात की दुआ की जाती है।
दुआ है कि फैसल मिर्ज़ा अपने वालिद-ए-मोहतरम की अच्छी रवायत, सादगी, ख़ुलूस और ख़िदमत के जज़्बे को आगे बढ़ाते हुए वार्ड की अवाम की बेहतरी और ख़िदमत में अपना किरदार अदा करें।
उत्तर प्रदेश डेस्क की ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल — “मुल्तानी समाज”
उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक
ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट
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