ग़ाज़ियाबाद/सरधना। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि जनाब शमीम अहमद साहब, वल्द जनाब शब्बीर अहमद साहब, निवासी डबल चक्के, सरधना, ज़िला मेरठ, उत्तर प्रदेश, हाल मुक़ाम पसौंडा, गरिमा गार्डन, ज़िला ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश, निकट गोल चक्कर, दिल्ली, की अहलिया रिहाना बी का आज मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान सुबह लगभग 9:00 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
मरहूमा के इंतक़ाल की ख़बर से खानदान, रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई। इस मुश्किल और सदमे की घड़ी में तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए ख़ुसूसी तौर पर दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और अल्लाह तआला उनके तमाम सगीरा-ओ-कबीरा गुनाहों को माफ़ फ़रमाकर अपनी रहमत-ए-कामिला में जगह अता फ़रमाए।
नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक
मिली हुई इत्तिला के मुताबिक़ मरहूमा रिहाना बी की नमाज़-ए-जनाज़ा नमाज़-ए-असर के बाद पसौंडा, गरिमा गार्डन, ज़िला ग़ाज़ियाबाद में अदा की जाएगी और इसके बाद मरहूमा को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि अपनी मसरूफ़ियत में से वक़्त निकालकर जनाज़े में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा खानदान के साथ शरीक-ए-ग़म हों।
जनाज़े में शिरकत के दौरान
जनाज़े में शामिल होने वाले हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए दिल से दुआ करें और अपनी ज़बान को ज़िक्र-ओ-दुआ से तर रखें।
नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद दुआ:
اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا، وَأَكْرِمْ نُزُلَهَا وَوَسِّعْ مُدْخَلَهَا، وَاغْسِلْهَا بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ۔
तर्जुमा:
ऐ अल्लाह! इसकी मग़फ़िरत फ़रमा, इस पर रहमत फ़रमा, इसे आफ़ियत अता फ़रमा और इससे दरगुज़र फ़रमा। इसके लिए अपनी मेहमाननवाज़ी को इज़्ज़त वाली बना और इसकी क़ब्र को कुशादा फ़रमा। इसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धोकर पाक फ़रमा।
कब्र में उतारते वक़्त
जब मरहूमा को कब्र में उतारा जाए तो यह पढ़ना मस्नून है:
بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ
तर्जुमा:
अल्लाह के नाम के साथ और अल्लाह के रसूल ﷺ के दीन और तरीक़े पर।
कब्र में मरहूमा को रखने के बाद तमाम हाज़रीन उनके लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अल्लाह तआला से सवाल करें कि वह कब्र के सफ़र को आसान फ़रमाए, कब्र को नूर से भर दे और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।
मिट्टी देते वक़्त
सुपुर्द-ए-ख़ाक के मौक़े पर मिट्टी डालते हुए यह आयत पढ़ना मुनासिब है:
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
तर्जुमा:
हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।
इसके बाद मरहूमा के लिए दुआ की जाए:
ऐ अल्लाह! मरहूमा रिहाना बी की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे कुशादा और रौशन फ़रमा, उनकी तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, कब्र के सवालात में आसानी अता फ़रमा, उनकी तमाम ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।
ऐ अल्लाह! जनाब शमीम अहमद साहब और तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फ़रमा और मरहूमा के लिए किया गया हर दुआ, सदक़ा और नेक अमल अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा।
आमीन या रब्बुल आलमीन।
तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात से ख़ुसूसी गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और दुआ-ए-मग़फ़िरत का एहतिमाम फ़रमाएँ और ग़मज़दा खानदान के साथ हमदर्दी का इज़हार करें।
ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल — “मुल्तानी समाज”
उत्तर प्रदेश डेस्क से
प्रधान संपादक — ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट
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