Saturday, September 26, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन — जवान बेटे मोहम्मद फ़रीद के इंतक़ाल से परिवार पर टूटा ग़म का पहाड़, पिछले साल छोटे बेटे को खो चुके थे शमीम अहमद

35 वर्षीय मोहम्मद फ़रीद ने मेरठ के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान ली आख़िरी साँस; एक साल के भीतर शमीम अहमद ने खो दिए अपने दो बेटे, बिरादरी में पसरा मातम

शामली, उत्तर प्रदेश।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिल को झकझोर देने वाली ख़बर के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि मोहल्ला सरवरपीर, शामली, उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद फ़रीद वल्द जनाब शमीम अहमद, उम्र लगभग 35 वर्ष, का आज शनिचर, 26 सितंबर 2026 को मेरठ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान शाम लगभग साढ़े 5 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

मरहूम मोहम्मद फ़रीद की अचानक मौत की ख़बर से अहले-ख़ानदान, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों, दोस्तों और पूरी मुल्तानी बिरादरी में गहरे रंज-ओ-मलाल की लहर दौड़ गई है। एक जवान बेटे की मौत का सदमा वैसे ही किसी भी वालिदैन और परिवार के लिए बेहद क़ल्ब-फ़िगार होता है, लेकिन जनाब शमीम अहमद के लिए यह सदमा और भी भारी है।

एक साल में शमीम अहमद ने खो दिए दो बेटे

बताया गया है कि जनाब शमीम अहमद के तीन बेटे थे, जिनमें से सबसे छोटे बेटे का पिछले वर्ष ही क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया था। अभी उस सदमे से परिवार पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि आज उनके बड़े बेटे मोहम्मद फ़रीद के इंतक़ाल ने परिवार को एक बार फिर गहरे सदमे और ग़म में डाल दिया।

एक ही परिवार में महज़ एक साल के दौरान दो जवान बेटों का दुनिया से चले जाना यक़ीनन बेहद दर्दनाक और आज़माइश की घड़ी है। इस मुश्किल वक़्त में अहले-ख़ानदान के साथ पूरी बिरादरी की हमदर्दी और दुआएँ हैं।

अभी मैय्यत घर लाई जा रही है, तदफ़ीन का वक़्त मुक़र्रर नहीं

ख़बर लिखे जाने तक मैय्यत मेरठ के अस्पताल से शामली स्थित घर लाई जा रही है। ज़िम्मेदारान की ओर से अभी नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन का वक़्त मुक़र्रर नहीं किया गया है।

जैसे ही नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन (सुपुर्द-ए-ख़ाक) का वक़्त मुक़र्रर होगा, उसकी इत्तिला ख़बर में अपडेट के ज़रिए दी जाएगी।

तमाम अहले-बिरादरी, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्तों से गुज़ारिश है कि तदफ़ीन के वक़्त की इत्तिला मिलते ही जनाज़े में शिरकत फ़रमाएँ और मरहूम के लिए ख़ुसूसी दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

मैय्यत को कब्र में उतारते वक़्त की दुआ

मैय्यत को कब्र में रखते वक़्त यह दुआ पढ़ी जाती है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ

“अल्लाह के नाम से और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।”

मिट्टी देते वक़्त अल्लाह तआला की तरफ़ से इंसान की पैदाइश और वापसी को याद करते हुए यह आयत पढ़ी जा सकती है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

“हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से दोबारा निकालेंगे।”
(सूरह ताहा, आयत 55)

दफ़्न के बाद मरहूम के लिए दुआ

मैय्यत को दफ़्न करने के बाद उसके लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करनी चाहिए:

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ

“ऐ अल्लाह! इसकी मग़फ़िरत फ़रमा, इस पर रहमत फ़रमा और सवाल के वक़्त इसे साबित-क़दम रख।”

अल्लाह तआला मोहम्मद फ़रीद मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमाए, उनकी कब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, तमाम मराहिल आसान फ़रमाए, सवाल-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फ़रमाए और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह रब्बुल-आलमीन उनके वालिद जनाब शमीम अहमद, तमाम अहले-ख़ानदान और पसमानदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। जिस परिवार ने एक साल के भीतर अपने दो बेटों को खोने का सदमा झेला है, अल्लाह तआला उनके दिलों को सब्र, सुकून और अपनी ख़ास रहमत से भर दे।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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